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ब्रह्मास्त्र | एक ऐसा अस्त्र जिसका वार कभी खाली नही जाता

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हेलो दोस्तों मेरा नाम है सूरज सिंह राजा और आज के इस लेख में हमलोग एक ऐसे शस्त्र के बारे में बाते करने वाले हैं जिसे ब्रह्मास्त्र कहते है।

ब्रह्मास्त्र इसके बारे में हम सभी ने कभी न कभी तो जरूर सुना है। हमारी धार्मिक कथाएं हो या फिल्मों तथा टेलीविजनों में इस शस्त्र के बारे में बताया ही गया है। ब्रह्मास्त्र यानी एक ऐसा शस्त्र जो सबकुछ नाश कर देने की क्षमता रखता है। इस शस्त्र का उपयोग हमारी पौराणिक कथाओं में कितनी बार हुआ है।

● ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कब और किसने किया?


★ ब्रह्मास्त्र को किसने बनाया?

> ब्रह्मास्त्र। इस शस्त्र की उत्पत्ति भगवान ब्रह्म ने की है। इस सृष्टि की रचना भी भगवान ब्रह्मा ने की थी। सृष्टि में सभी कार्य नियमपूर्वक हो और नियंत्रण बना रहे इसलिए असुरों, राक्षसों तथा दानवों के वध के लिए भगवान ब्रह्म ने इस शस्त्र का निर्माण किया। ब्रह्मास्त्र की मारक क्षमता अचूक है। ब्रह्मास्त्र के उपयोग से पूरी को सृष्टि एक क्षण में समाप्त किया जा सकता है।

★ ऋषि विश्वामित्र द्वारा ब्रह्मास्त्र का उपयोग

> ऋषि विश्वामित्र ने महर्षि वशिष्ठ की गाय नंदिनी की प्राप्ति के लिए महर्षि वशिष्ठ के खिलाफ ब्रह्मास्त्र का उपयोग किया था। लेकिन महर्षि वशिष्ठ ने अपने तपोबल से बह्मास्त्र के वार को रोक लिया था।

★ ऋषि पिप्पलाद ने किया था ब्रह्मास्त्र से शनिदेव पर वार

> पौराणिक कथाओं के अनुसार ऋषि पिप्पलाद, महर्षि दधीचि के पुत्र थे। महर्षि दधीचि की जब मृत्यु हुई और जब ऋषि पिप्पलाद को ये पता चला कि उनके पिता महर्षि दधीचि की मृत्यु शनि के प्रकोप के कारण हुई है, तब ऋषि पिप्पलाद ने शनिदेव पर ब्रह्मदंड शस्त्र से वार किया। इसी वार कारण शनिदेव लंगड़ाकर चलते हैं। तब शनिदेव ने ऋषि पिप्पलाद को वचन दिया था कि वह 12 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को पीड़ा नहीं देंगे।

★ इंद्रजीत ने हनुमानजी पर चलाया था ब्रह्मास्त्र

> इंद्रजीत ने लंका में माता सीता की खोज पर आए भगवान हनुमान जी पर ब्रह्मास्त्र का उपयोग किया था। हालांकि त्रिदेव तथा अन्य देवी-देवताओं से हनुमानजी को आशीर्वाद प्राप्त था कि उनपर किसी भी अस्त्र-शस्त्र का कोई प्रभाव नहीं होगा। लेकिन हनुमान जी ने भगवान ब्रह्मा जी का मान रखने के लिए ब्रह्मास्त्र के पाश में अपनी स्वेच्छा से बंध गए। फिर इंद्रजीत उन्हें रावण की सभा में ले गया, जहां हनुमान जी की पूंछ में आग लगा दी गई।

★ महाभारत काल में ब्रह्मास्त्र का उपयोग

> महाभारत काल में ब्रह्मास्त्र के उपयोग का वर्णन महाभारत युद्ध के बाद मिलता है। महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद जब अश्वत्थामा पांडवों के सोते हुए पुत्रों को छल से मार देता है।

सभी पुत्रों की इस प्रकार निर्मम हत्या देख अर्जुन इस अपराध की सजा देने के लिए अश्वत्थामा का पीछा करते हैं, जब अश्वत्थामा और अर्जुन का आमना-सामना होता है तो अर्जुन से भयभीत होकर अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर देता है। अर्जुन भी बचाव में भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर ब्रह्मास्त्र चला देते हैं।

सृष्टि का विनाश न हो जाये ये देखते हुए महर्षि व्यास ने बीच-बचाव किया। महर्षि वेदव्यास ने अश्वत्थामा और अर्जुन से अपने-अपने ब्रह्मास्त्र को वापस लेने को कहते है। अर्जुन ने अपने ब्रह्मास्त्र को वापस ले लिया लेकिन अश्वत्थामा को ब्रह्मास्त्र वापस लेना नही आता था इसलिए उसने ब्रह्मास्त्र की दिशा घुमाकर उत्तरा के गर्भ में पल रहे उसके पुत्र परीक्षित का अंत कर दिया लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित को फिर से जीवन प्रदान कर दिया।

★ ब्रह्मास्त्र का अर्थ क्या है?

ब्रह्मास्त्र का अर्थ होता है ब्रह्म का अस्त्र। ब्रह्मास्त्र यह एक ऐसा दिव्यास्त्र है जो परमपिता भगवान ब्रह्मा का सबसे मुख्य अस्त्र माना जाता है।

★ सबसे शक्तिशाली अस्त्र कौन सा है?

ब्रह्मास्त्र। यह एक अचूक और विकराल शस्त्र है। ब्रह्मास्त्र शत्रु का नाश करके ही छोड़ता है। इसका प्रतिकार दूसरे ब्रह्मास्त्र से ही हो सकता है, अन्यथा नहीं।

★ ब्रह्मास्त्र की तरह और कितने शस्त्र है?

> ब्रह्मास्त्र की तरह तीन और अस्त्र थे- ब्रह्माण्डास्त्र, ब्रह्मशीर्षास्त्र और नारायणास्त्र किन्तु ये तीनों अस्त्र और भी शक्तिशाली थे।

Note:- इन तीनों अस्त्रों के बारे में अलग से पढ़ने के लिए कमेंट करें।

भगवान ब्रह्मा ने दैत्यों के नाश हेतु ब्रह्मास्त्र की उत्पति की थी। ब्रह्मास्त्र का अर्थ होता है ब्रह्म का अस्त्र। प्राचीनकाल में शस्त्रों से ज्यादा संहारक अस्त्र होते थे। शस्त्र तो धातुओं से निर्मित होते थे लेकिन अस्त्र को निर्मित करने की विद्या अलग ही थी।

 

★ अस्त्र और शस्त्र में क्या अंतर है?

> प्राचीनकाल में शस्त्रों से ज्यादा संहारक अस्त्र होते थे। शस्त्र तो धातुओं से निर्मित होते थे, जिनके प्रहार से चोट पहुँचती है और मृत्यु होती है। लेकिन अस्त्र उसे कहते हैं, जिसे मन्त्रों के उच्चारण के द्वारा दूरी से फेंकते हैं। वे अग्नि, गैस और विद्युत तथा यान्त्रिक उपायों से चलते हैं।

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