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एक ऐसी अखंड ज्योति जो 550 सालों से जल रही है इस ज्योति से निकलते है केसर

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हमारा देश भारत जो विविधता में एकता का देश है। यह एक ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के लोग रहते है तथा इस देश में मंदिरों की भी कमी नही है। इस देश में मंदिरों की भरमार है।

भारत में जो लोग ईश्वर में श्रद्धा रखते है तथा पूजा-पाठ करते है वो इन मंदिरों में आकर अपने आराध्य देव को पूजते हैं और उनसे अपने और अपने परिजनों के भले की कामना करते हैं।

आपलोग भी जब कभी मंदिर जाते होंगे तो वहां आपलोग देखते होंगे कि मंदिर में कई सारे दिये और ज्योति जल रही हैं। मन्दिर में जल रहे इन दियों और ज्योति को शुभ माना जाता है। ये दीये जब जलते हैं तो इनमें से कालिख जैसी चीज निकलती है।

लेकिन आज के इस लेख में हम आपलोगों को एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें रखे हुए दिये से केसर निकलता है।


यह मंदिर मनासा शहर (मध्यप्रदेश) से लगभग 3 किमी दूर एक अल्हेड में मौजूद है। इस मंदिर को 'आई जी माता मंदिर' के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पर एक ज्योति जल रही है, इस जल रही ज्योति को लेकर यह दावा किया जाता है कि ये ज्योति पिछले 550 वर्षों से ज्यों की त्यों जल रही है।

इतने वर्षों में एक दिन भी ऐसा नहीं रहा जब ये बुझी हो। इस मंदिर में जल रही इस ज्योति को देशी घी की मदद से जलाया जाता है। इतना ही नही जब ये ज्योति जलती है तो इसमें से कालिख की जगह केसर निकलता है।


आपलोग सोच रहे होंगे है कैसे हो सकता है लेकिन ये सच है, जब ये ज्योति जलती है तो इसमें से केसर टपकता है। इस मंदिर के आस-पास के लोग इस केसर को मां का प्रसाद मानते हैं तथा इसे अपनी आँखों में लगाते हैं।

★ आई जी मंदिर नाम कैसे पड़ा?

इस मंदिर का नाम ऐसा कैसे पड़ा इसके पीछे भी एक कहानी है, बताया जाता है कि एक बार इस मंदिर में माता आईं थीं और इसीलिए लोग इसे 'आई जी मंदिर' कहते हैं। इस मंदिर को देखने आये श्रद्धालुओं के अनुसार इस दिव्य दिये से निकलने वाले केसर को जो भी व्यक्ति अपनी आँख में लगाता है वो सभी तरह के रोगों से मुक्त हो जाता है।

★ मंदिर का पौराणिक इतिहास

इस मंदिर को लेकर एक पौराणिक कथा ये भी है की एक बार दीवान वंशज के राजा माधव अचानक ही कहीं गायब हो गए, उस राजा को काफी ढूंढा गया लेकिन उसका पता कहीं नही चला, तब उन्हें ढूंढने माता निकली और माता को वो राजा इसी गांव में मिले थे।


बताया जाता है कि उसी दिन से माता इस मंदिर में विराजमान है और ये ज्योति भी उसी दिन से इस मंदिर में जल रही है। इस मंदिर से केसर को पाने के लिए लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके यहां आते हैं।

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